आराधना
ताः५/५/१९७९. प्रदीप ब्रह्मभट्ट
*(मंदीरके द्वारपर खडे एक अंधभीक्षुककी आवाज)
तेरे दर्शनको आये हुओको हजारो सलाम
तेरे द्वार खडा तेरा ये द्वारपाल ओ परवरदीगार.
……..तेरे दर्शनको.
जीवन जगका पाया सबने,हमने उसको पाया
पा सकते तेरी असीम भक्ति,पाजाता जगसारा
तेरे सामने आके हाथ पसारे..(२)
जो होगा थोडा दुःखी………………..तेरे द्वारपर खडा.
अपना सबकुछ तेरी शरण,पाना है सुखधाम
ज्योति मेरी क्यु ली तुने,मुझको क्युसताया
दीप जलाकर अपने मनका..(२)
पुरण करनी आशा …………………तेरे द्वारपर खडा.
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