हम सफर Friday, Apr 18 2008
પ્રેમગીત 4:12 pm
हम सफर
हम सफर बनके चले तो जींदगी है खुशहाल
साथ तेरा जींदगी भरका हम कैसे रहे बेहाल
सजनीप्यार तेरा बेमीशाल
जीसपे दीलमेरा हैकुरबान
अपनी नाकोइ सोच जीसपे दिलतेरा थोडाखचके
चाल तेरी जबभी देखु दील मेरा तब लगे डोले
महेंके जीवन मेरा आज
संगे मेरे मेरा हो दिलदार
ना अपनी कोइ पहेचानथी भटक रहे थे हम
तुने दिलको थाम लीया साथी बने अब तुम
प्यारकी राह तुने दीखलायी
मुस्कुरा रहा मेरा जीवन
तुने आकर मेरेजीवनकी दोर पकडली दीलसे
समजना पाया संसारीजीवन महेकरहाजोतुमसे
वक्त नही अब पास हीमेरे
तेरे संगजीवन मेराजुडा
ँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
April 19, 2008 at 10:09 am
समजना पाया संसारीजीवन महेकरहाजोतुमसे સરસ
सुहाना सफर और यह मौसम सखी ।
हमें डर है हम खो न जाएं कही । जीवन को सुहाना सफर समझना ही दुखों से झूझने की प्रेरणा भी देता है और शक्ति भी प्रधान करता है।
પણ આ સફરને સલામ
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफर करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी
પ્રજ્ઞાજુ વ્યાસ