मिलता है
ताः१६/१०/२००९ प्रदीप ब्रह्मभट्ट
सच्चे दीलसे काम करो, तुम्हे साथ मिलता है
मनसे भक्ति करते चलो, प्रभुका प्यार मिलता है
……..सच्चे दीलसे काम करो.
अवनीके बंधनसे जीवको,मुक्तिका द्वार मिलता है
सच्चीराहपे चलके दिलसे,संतोको सन्मान देना है
जगके बंधन छोडकेजीवको,मुक्तिका मार्ग लेना है
मिलतीहै राह सच्ची,ओर प्रभुका प्यार मिलता है
……..सच्चे दीलसे काम करो.
जिंदगीकी हर मोड पे,जब दीलसे महेनत मिलती है
पाता वो इन्सान सबकुछ,जो पैसोसे नहीं मिलता है
इन्सानियत जब दीलमें बसीहो,मंझील पास आती है
उज्वलजीवन होजाता तब,जीवनमे शांन्ती मिलती है
……..सच्चे दीलसे काम करो
आनाजाना बंधन है कर्मोका, ना कोइ छुट पाया है
भक्तिभावका नाता है जगमें,ना उसमे कोइ बाधा है
प्रेम प्रभुसे दीलसेहोगा,जीवन जगमे पावन मिलता
आयेगी ना व्याधी कोइ,जहां प्यार जलासांइका होता
………सच्चे दीलसे काम करो.
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Filed under: આધ્યાત્મિક કાવ્યો
इन्सानियत जब दीलमें बसीहो,मंझील पास आती है
उज्वलजीवन होजाता तब,जीवनमे शांन्ती मीलती है
Very Nice message in Pradipji’s poem..All the best wishes.