अभीलाषा अंतरकी


                        अभीलाषा अंतरकी            

ताः२१/११/२००८                       प्रदीप ब्रह्मभट्ट

आसमानके  तारे जिसको   छु न पाया मे
जमीनके सितारे  आजतक गीनना पायामें

देखरहा था सोचरहा था बचपनसेजवानीतक
आते जाते हर खयालोमें उलझा रहाथा में
क्याक्याकरकेभटक रहाथा नामिली पहेंचान

अनजाने सेराह देखी जहॉ देखे श्रीजलाराम
भक्ति अंबरके तले ये महेंक रहाथा संसार
ना गहेराइथी ना उचाइ सबथा एक समान

प्रेमकेपावन द्वारपे खडा देखरहा में ये संसार
अंतरयामी ओरबलीहारी देखरहा में अवतार
उज्वल जन्म पावन कर्म दो जीवथे महान

मोह नाकहीं ना अभीलाषा ओर कोइ अपेक्षा
सांइमीले जलाराममीले नाझंखना कोइ ओर.

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