प्रेमीज्योत


.                        प्रेमीज्योत

ताः१३/१२/२०१३                  प्रदीप ब्रह्मभट्ट

जीवनकी अनेक राहोंमे,सुख दुःख रहेते है साथ
प्रेम भावसे चलते रहेनेसे,हो जाये उज्वल आज
.                ………………जीवनकी अनेक राहोंमे.
अपनोसे ना आशा रखना,ना कोइ अपेक्षा आज
उज्वल जीवन मील जानेसे,प्रभुक्रुपाभी हो साथ
लेकर ज्योतप्रेमकी जीवनमें,मीलजाये सुखधाम
प्यारकी एकमीठी लहेरसे,मील जायेगा सन्मान
.                  ……………..जीवनकी अनेक राहोंमे.
मानव देह एक देन है,जो जन्म सफल कर जाय
श्रध्धा और सबुरी समझनेसे,हो जायेंगे भव पार
अपनोसे जब मीलजायेंगे,खुल जाये भक्तिद्वार
ज्योतप्रेमकी एकही जलनेसे,होजाये निर्मलकाम
.                   ………………जीवनकी अनेक राहोंमे.

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