जींदगीकी सफर


.                         जींदगीकी  सफर 

ताः२३/११/२०१८                           प्रदीप ब्रह्मभट्ट  

जींदगीकी सफर हो सुहानी,जहां दीलसे महेंकती राहको पाइ
नहीं मोह रखा जीवनमे चलती राहोमे,ना कोई अपेक्षा रखाई
......येही पावनप्रेमका संगाथ रहे जीवनमे,कुदरतकी पावनलीला पाई.
जीवनमे संगाथ मीले पलपलमे,येही अदभुतलीला अविनाशीकी
प्रेमका सागर जीवनमे अनंतआनंद देता,सर्जनहारकी ये क्रुपा
सरळजीवनमें प्रेममीले निर्मळभावे,जो मनको अनंत शांंन्ति दे
नामोह अडे नामाया अडे जीवनमें,येही निर्मळ जीवनकी केडी
......येही पावनप्रेमका संगाथ रहे जीवनमे,कुदरतकी पावनलीला पाई.
मळेल मानवदेह जीवको अवनीपर,ये कर्मके संबंधकी निशानी
निर्मळ ओर नीखालस जीवन,जन्ममरणका संगाथ जीवको देता
प्रेम निखालस मीलता जीवनमें,जहां श्रध्धाभावसे भक्तिराह मीले
अनेकराह जगतपर है निराली,मनको सुखशांंन्तिका संगाथ रहे
......येही पावनप्रेमका संगाथ रहे जीवनमे,कुदरतकी पावनलीला पाई.
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